महाराणा प्रताप सरोवर को यह नाम 16 वीं शताब्दी के राजपूताना की दन्तकथा के बाद दिया गया है। यह मानव मिर्मित जलाशय पहले पौंग बांध जलाशय के रूप में जाना जाता था यह समुद्र के स्तर से 450 मीटर की ऊंचाई पर होते थे। पौंग बांध बाद में हिमाचल के दक्षिण-पश्चिम छोर पर ब्यास नदी पर बनाया गया था। यह सरोवर कांगड़ा जिला में पड़ता है तथा 45000 हैक्टेयर क्षेत्र को आवरित करता है। यह राज्य में मनुष्य द्वारा बनाया गया दूसरा वहृत जलाशय है।
इसके पृष्ठ पट में आकर्षक धोलकर का क्षेत्र नजर आता है और यह स्थान शिवालिक रेंज में स्थित है। झील का चमकता हुआ एवं सुन्दर दृश्य बार-बार आने का उकसाता है।
कैसे पहुँचे
पहुँचने का उत्तम विकल्प रेल-सड़क का सम्मिक्ष्ण है। यह स्थान निम्नानुसार है:-
चण्डीगढ़ से 170 कि.मी.
अमृतसर से 110 कि.मी.
धर्मशाला से 55 कि.मी.
नजदीकी एयर पोर्ट लुधियाना तथा अमृतसर है।
नजदीकी रेलवे स्टैशन मुकेरियां-30 कि.मी. तथा पठानकोट 32 कि.मी.।
पठानकोट तथा ऊना का रेल स्टैशन एक्सप्रैस ट्रेनों द्वारा दिल्ली के साथ जुड़ा हुआ है।