अध्‍यक्ष

श्री .बी. अग्रवाल

सदस्‍य     (विद्युत)       (पूर्ण कालिक) श्री अशोक थापर

सदस्‍य (सिंचाई)            (पूर्ण कालिक)

श्री एस. एल. अग्रवाल

सदस्‍य, भारत सरकार

 

जी. साईं प्रसाद, आई..एस

संयुक्त सचिव (हाइड्रो), भारत सरकार

विद्युत मंत्रालय, नई दिल्ली।

सदस्‍य, भारत सरकार

 

श्री जी अरंगानाथन

आयुक्त (इन्डस), भारत सरकार

जल संसाधन मंत्रालय, नई दिल्ली।

सदस्‍य, पंजाब

डॉ. जी. वज्रलिंगम, आई..एस

सचिव, पंजाब सरकार

सिंचाई विभाग, चण्डीगढ़

सदस्‍य हरियाणा

श्री   के.के. जलान, आई.ए.एस

वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव, हरियाणा सरकार 

सिंचाई विभाग, चण्डीगढ़

सदस्‍य, राजस्‍थान

श्री राम लुभाया, आई..एस

प्रधान सचिव, राजस्थान सरकार

जल संसाधन विभाग, जयपुर

सदस्‍य, हिमाचल प्रदेश

श्री दीपक सनन, आई..एस,
प्रधान सचिव
, हिमाचल सरकार,  एम पी पी एव विद्युत विभाग,शिमला।





अध्‍यक्ष
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श्री .बी. अग्रवाल, कार्यकारी निदेशक, एनएचपीसी लिमिटेड ने भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड  के अध्यक्ष के रुप में 19.3.2010 को पदभार ग्रहण किया। श्री अग्रवाल 'प्रथम श्रेणी में प्रथम' मेकैनिकल इंजीनियरिंग स्नातक हैं और वित्त में एमबीए हैं। ये एक बहुमुखी जल-विद्युत व्यवसायी हैं और इन्हें एनएचपीसी लिमिटेड में विभिन्न पदों पर 31वर्ष से अधिक अवधि का अनुभव प्राप्त है। एनएचपीसी जल विद्युत विकास के क्षेत्र में एक सर्वाधिक प्रतिष्ठित केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है और परियोजना की संकल्पना से लेकर उसे चालू करने तक तथा विद्युत केन्द्रों के प्रचालन एवं अनुरक्षण में सक्षम है। देश में सबसे बड़ी निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजना 2000 मेगावाट सुबनसिरी लोअर जल विद्युत परियोजना का नेतृत्व करते हुए इन्होंने अपनी डायॅनामिक, सामाजिक नेटवर्किंग तथा नेतृत्व क्षमताओं द्वारा जल विद्युत निर्माण के नए मानक स्थापित करने में सहायता की है। ये एनएचपीसी के सबसे बड़े विद्युत केन्द्र जम्मू-कश्मीर के 690 मेगावाट सलाल विद्युत केन्द्र के प्रभारी रहे हैं, जो देश में प्रचालित सर्वाधिक गाद-ग्रस्त संयंत्र है। इनकी इनोवेटिव एवं मूल्य-प्रभावी पहल इस विद्युत केन्द्र को उस समय के सभी केन्द्रीय क्षेत्र के विद्युत केन्द्रों में प्रति मेगावाट प्रचालन एवं अनुरक्षण लागत के मामले में सर्वाधिक किफायती जल विद्युत केन्द्र बनाने में सहायक रही। संकट ग्रस्त 105 मेगावाट लोकटक विद्युत केन्द्र (मणिपुर) और 390 मेगावाट दुलहस्ती विद्युत केन्द्र (जम्मू-कश्मीर) में भी इनका कार्यनिष्पादन अत्यन्त उल्लेखनीय रहा है। जल विद्युत विकास के सभी सहायक कार्यों जैसे वाणिज्यिक, संविदाओं, गुणवत्ता प्रत्याभूति एवं निरीक्षण, अनुसंधान एवं विकास तथा निर्माण उपकरण योजना में इन्हें व्यापक अनुभव प्राप्त है। इनके पिछले कार्य में इनके समक्ष कई चुनौतियां थीं क्योंकि ये मानव संसाधन प्रबंध, कार्पोरेट कम्यूनिकेशन, चिकित्सा सेवाएं, राजभाषा तथा संपदा एवं सुविधा प्रबंध सेवाएं, आदि के प्रमुख थे। इनके कार्यकाल के दौरान सुसंगठित प्रचार अभियान के कारण, एनएचपीसी का आईपीओ 24 गुणा अधिक सब्सक्राइब हुआ था।

 

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सदस्‍य (विद्युत)     

इंजी अशोक थापर को भारत सरकार द्वारा बीबीएमबी में सदस्य, विद्युत के रूप में नियुक्त किया गया है। इन्होंने अपने नए पद पर दिनांक 21.2.2011 को कार्यभार संभाला। श्री थापर इलैक्ट्रॉनिक्स एण्ड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक हैं और इनका विद्युत क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं जैसे पंजाब राज्य बिजली बोर्ड (पं.रा.बि.बोर्ड अब पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड) के लार्ज फॉसिल फायर्ड थर्मल पावर परियोजनाओं तथा भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड की मीडियम टू लार्ज जल विद्युत परियोजनाओं की प्लानिंग, डिज़ाइन, निर्माण, परीक्षण, आरम्भ करने तथा उनका परिचालन और अनुरक्षण करने का 34 वर्षों का गहन अनुभव है।
अपने नए कार्य से पूर्व इंजी. थापर 10 जून, 2010 से भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड में मुख्य अभियन्ता, उत्पादन के रूप में कार्य कर रहे थे और इनके पास बीबीएमबी के सभी हाइड्रोलिक उत्पादक परियोजनाओं का प्रबन्ध करने का कार्य था। बीबीएमबी भाखड़ा (बायां एवं दायां किनारा), गंगूवाल, कोटला, देहर और पौंग विद्युत घरों के 28 हाइड्रो पावर स्टेशनों से लगभग 2865 मेगावाट विद्युत उत्पादन करता है। बीबीएमबी की परियोजनाओं उत्तरी ग्रिड की रीढ़ की हड्डी हैं और उत्तरी ग्रिड को आकस्मिक मांग के दौरान विद्युत उपलब्ध कराने के अतिरिक्त दुलर्भ समय में पींकिंग पावर उपलब्ध कराते हैं।
जीवन काल की उपलब्धियां (बीबीएमबी में हाइड्रो अनुभव): सितम्बर, 1995 से अब तक, 14.60 वर्ष से निरन्तर।
सत्ताकाल में प्रगति के दौरान इनकी सफलताओं की अनेक कहानियां हैं जिनमें से कुछ नीचे सूचीबद्ध की गई हैं:-
(क) निदेशक, सुरक्षाः- निदेशक, सुरक्षा के रूप में इंजी. अशोक थापर ने सुरक्षा संबंधी षडयंत्र की आशंका को पहले ही समझते हुए (देश की अग्रणी चौकसी एजेंसियों द्वारा प्रक्षेपित) केन्द्रीय/राज्य प्रशासन और चौकसी प्राधिकारियों की हिदायतों अनुसार उनसे गहन परामर्श करके उन्हें विफल किया। भाखड़ा बांध में सुरक्षा संबंधी उपायों को सुदृढ़ करने के लिए किए गए प्रयासों हेतु बोर्ड ने अपनी 201वीं बैठक में इनकी प्रशंसा भी की।
इंजी. थापर ने बीबीएमबी के अतिरिक्त सभी स्टेकहोल्डर्स यथा चौकसी ब्यूरो (आई बी) हिमाचल प्रदेश तथा पंजाब पुलिस विभागों, सीआईएसएफ की अपेक्षाओं और इनकी तकनीकी विशिष्टताओं को अन्तिम रूप देने के लिए एक पारदर्शी प्रक्रिया तैयार की। यह उल्लेख करना भी आवश्यक है कि सभी स्टेकहोल्डर्स ने इनके इस प्रयास की प्रशंसा भी की है।
(ख) निदेशक परामर्शः 
इंजी. थापर, बीबीएमबी की परामर्शी सेवाएं आरम्भ करने में सहायक रहे हैं और इसके बाद इसे विकसित करते रहे हैं। बीबीएमबी के भागीदार राज्यों से सहमति प्राप्त करने के उपरान्त विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सौंपे गए अनुसार परामर्शी सेवाएं बीबीएमबी का एक अतिरिक्त कार्य हो गया है। ये विभिन्न क्षमताओं में इसके अभिन्न अंग रहे हैं। इनके द्वारा आरम्भ किए गए कुछ महत्वपूर्ण कार्य निम्नानुसार हैं:ं-
• यू.टी. चण्डीगढ़, प्रशासन और पीजीआईएमईआर की ओर से सेक्टर 56 और सेक्टर-12 में टर्नकी आधार पर 66 केवी उपकेन्द्र का लागत प्रभावी विकास।
• हरियाणा और दिल्ली की विद्युत यूटिलिटिज़ की थर्मों विजन स्कैनिंग और हॉटलाइन अनुरक्षण के लिए विशेषज्ञ सेवाएं।
• नंगल मैकेनिकल कार्यशाला से पं.रा.बि.बोर्ड के लिए हाइड्रो गैस सिलेण्डर्स का हाइड्रोस्टेटिक स्ट्रेच परीक्षण।
• प्रणाली में उपलब्ध लगभग 150 मेगावाट की टैपिंग हाइड्रो पोटेंशियल हेतु बीबीएमबी में नई परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्टों का विकास।
• बीबीएमबी में आइएसओ 9001 और 14001 (गुणवत्ता और पर्यावरण प्रबन्धन प्रणाली) का क्रियान्वयन। 
• आरएलए के स्कोप का आकलन करने के लिए गांधी सागर हाइड्रो इलैक्ट्रिक परियोजना की पांच मशीनों के नवीनीकरण, आधुनिकीकरण और उन्नयन के संबंध में परामर्शी सेवाएं।
• यूजेवीएनएल और टीएनईबी को उनके हाइड्रो पावर स्टेशनों के लिए परामर्शी सेवाएं।
(ग) नई संकल्पना और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने का प्रयासः-
भाखड़ा बायां किनारा परियोजना की नई मशीनों की बढ़ी हुई दक्षता के कारण उत्पादित (सीईआरएस) की बिक्री द्वारा स्वच्छ विकास प्रक्रिया (सीडीएम) के अन्तर्गत कार्बन ट्रेडिंग हेतु बीबीएमबी द्वारा की गई पहल को अन्तिम रूप दिया गया। विश्व बैंक पंजीकरण होने तक सभी खर्चों सहित सीईआर को 12 € की दर से खरीदने पर सहमत हो गया है। इससे बीबीएमबी, इस प्रक्रिया द्वारा लक्ष्य प्राप्त करने वाला प्रथम पब्लिक सेक्टर संगठन हागा। इंजी. थापर देश की अन्य विद्युत यूटिलिटिज़ को भी इसका अनुकरण करने के लिए बढ़ावा दे रहे हैं।
• यूनिफार्म स्टेंडर्ड आईईसी 61850 के द्वारा भविष्य में प्रोटेक्टिव गियर की प्राप्ति और बदलने हेतु रोड मैप तैयार करने में सहायक रहे। स्टेट-ऑफ-द-आर्ट प्रोटेक्टिव डिजिटल उपकरण, सिस्टम में कंडीशन मानीटरिंग हेतु इन्स्ट्रूमेंटेशन और डायग्नोस्टिक टूल्ज पेश किए।
• परिचालन एवं अनुरक्षण तकनीकों की गुणवत्ता में सुधार करने हेतु बीबीएमबी विद्युत घरों में "लेखा परीक्षा" की संकल्पना को बढ़ावा और क्रियान्वित किया। इस विचारधारा को अब केन्द्रीय सिंचाई एवं ऊîर्जा बोर्ड (सीबीआईपी) द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है।
(ग) निदेशक मानव संसाधन विकासः
• बीबीएमबी और इसके भागीदार राज्यों के लगभग 13,000 अभियन्ताओं और कर्मचारियों के लिए परामर्शदाता के रूप में कार्य किया। विद्युत क्षेत्र में सुधार करने हेतु विद्युत मंत्रालय द्वारा प्रायोजित वितरित सुधार उन्नयन एवं प्रबंधन (डीआरयूएम) कार्यक्रम के अंतर्गत पावर यूटिलिटिज़ के अभियन्ताओं तथा तकनीशियनों के लिए अगस्त, 2005 से नंगल में प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के सफलतापूर्वक संचालन को बढ़ावा देने में सहायक रहे हैं। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य-प्रदेश लाभानुभोगी राज्य रहे हैं।
• उत्तरांचल जल विद्युत निगम और एनटीपीसी के कार्मिकों के लिए विशिष्ट अल्प अवधि हाइड्रो प्रशिक्षण आयोजित किए।
• ऊर्जा संरक्षण पर राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत स्टॉफ तथा उनके परिवारों के लिए ऊर्जा संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम प्रारम्भ किया। पंजाब, हरियाणा तथा केन्द्र शासित प्रदेश चण्डीगढ़ के बच्चों के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन करने हेतु वे नोडल अधिकारी रहे हैं।
घ) योजना एवं रूपांकन
• बीबीएमबी के आरएमएण्डयू कार्यक्रम के लिए नियंत्रण, इन्स्ट्रूमैंटेशन तथा प्रोटैक्शन, रूपांकन तथा प्रापण प्रकोष्ठ की विशेष तौर पर स्थापना की।
• इन-हाउस जल/विद्युत विनियम का सफलतापूर्वक अध्यययन किया गया। इससे भाखड़ा बायां किनारा विद्युत घर के आरएमएण्डयू में तीव्रता आई जिससे इसकी उत्पादन क्षमता 5 x 108 मेगावाट से बढक़र 5 x 126 मेगावाट हो गई।
• कार्यालय के दिन प्रतिदिन के कार्यों में सुधार करने हेतु कम्प्यूटरीकरण तथा कार्यालय स्वचलन (ऑटोमेशन) प्रस्तुत किया।
• जीवन की उपलब्धियां (थर्मल सेक्टर): दिसम्बर 1976 से सितम्बर 1995 15-41 वर्ष इंजी. थापर ने वर्ष 1977 में पंजाब राज्य बिजली बोर्ड में कार्यभार संभाला तथा उन्हें कन्ट्रोल तथा इंन्सट्रूमेंटेशन (सीएण्डआई) डिविजन में चुनौतीपूर्ण कार्य सौंपा गया। ये कन्वेशनल टाइप और डिस्ट्रीब्यूटिड डाटा कन्ट्रोल टाइप दोनों कन्ट्रोल्स, जीजीएसएसटीपी, रोपड़ थर्मल में 6 x 210 मेगावाट और जीएनडीटीपी, भठिंडा में 4 x 110 मेगावाट (यूनिट 3 एवं 4) पर इन्सट्रूमेंटेशन और प्रोटेक्शन उपकरणों के निर्माण, परीक्षण, चालू करने और अनुरक्षण के लिए उत्तरदायी रहे हैं। इन्होंने सीमेन्ज़, केडब्ल्यूयू, हार्टमान तथा ब्रॉन-पश्चिम जर्मनी, वेस्टिंगहाउस इलैक्ट्रिक कारपोरेशन-यूएसए एण्ड इन्स्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड, बीएचईएल-इंडिया से प्राप्त अति परिष्कृत स्टेट-ऑफ-द-आर्ट उपकरणों को संभाला। ये रोपड़ थर्मल परियोजना की यूनिटों के निर्माण तथा उन्हें चालू करने में राष्ट्रीय रिकार्ड बनाने वाली टीम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।
इंजी. थापर ने कन्वेंशनल तथा माइक्रोप्रोसेसर आधारित इन्स्ट्रूमेंटेशन उपकरणों को आयात प्रतिस्थापन के एवज में देशज़ रूप से विकसित एवं उन्नत किया। (जो उस समय की आवश्यकता थी)
जीवन की उपलब्धियां (सामान्य):
इंजी. थापर ने नापथा झाकड़ी विद्युत परियोजना के सुचारू रूप से संचालन को बाधित करने वाले मामलों का हल निकालने में केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण, एनएचपीसी तथा एसजेवीएनएल के साथ संयुक्त रूप से हिस्सा लिया तथा इस बारे में अपनी संस्तुतियां/सुझाव दिए। तब से परियोजना का निष्पादन बहुत अच्छा रहा है। इनकी इस सराहनीय सेवा के लिए इन्हें साइटेशन तथा प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया गया। इंजी. थापर ने विदेश में निम्नलिखित विशिष्ट प्रशिक्षण और अध्ययन हेतु दौरे किए हैं :
• विशिष्ट कन्ट्रोल इन्स्ट्रूमेंटेशन तथा प्रोटेक्शन उपकरण की डब्ल्यूडीपीएफ रेंज पर वेस्टिंगहाउस इलैक्ट्रिक कारपोरेशन- यू.एस.ए।
• सीमेन्ज़-पश्चिम जर्मनी में बड़ी टरबाइनों तथा जनरेटरों हेतु उनके विशिष्ट उत्पाद पर 
• हार्टमान एण्ड ब्रॉन-पश्चिम जर्मनी में लार्ज फॉसिल फायर्ड बायलर्स हेतु उनके विशिष्ट उत्पादनों पर।
• केडब्ल्यूयू- पश्चिम जर्मनी में बड़ी टरबाइनों और जनरेटरों हेतु उनके विशिष्ट उत्पादों पर।
• आस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड में जल-विद्युत परियोजनाओं से संबंधित अध्ययन यात्रा।
• वर्ष 2003 में सिडनी, आस्टेलिया में- सीआईजीआरई सत्र।
निजी विशेषताएं :
• 56 वर्षीय (जन्म तिथि : 8 सितम्बर, 1954) विवाहित, तीन बच्चे, स्वस्थ तथा ऊर्जावान, अत्याधुनिक तकनीकों के बारे में गहन अभिरूचि और जागरूकता, खेलों, संगीत, पठन और सामाजिक कार्यों में र
ूचि।

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सदस्‍य ( स‍िंचाई)

इंजी. एस. एल. अग्रवाल ने दिनांक 26.08.2011 को सदस्य (सिंचाई) का कार्यभार ग्रहण किया। 1 मई, 1956 को जन्में इंजी. अग्रवाल ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चण्डीगढ़ से वर्ष 1978 में सिविल इंजीनियरिंग में बी.एस.सी इंजीनियरिंग (ऑनर्स सहित) की शिक्षा प्राप्त की।

इन्होंने हरियाणा सिंचाई विभाग में 27.12.1978 को सहायक अभियन्ता (सिविल) का पदभार संभाला और एचपीएससी द्वारा 11.9.1980 को एचएसई– I सेवाओं में सहायक कार्यकारी अभियंता (सिविल)के रूप में नियुक्त हुए। इंजी. अग्रवाल ने 6 वर्षों तक उप –मण्डल अधिकारी (एईई रैंक) के रूप में हाइड्रॉलिक संरचनाओं के निर्माण तथा अन्य संबद्ध सिविल कार्यों को निष्पादित किया। इंजी. अग्रवाल कार्यकारी अभियंता के पद पर पदोन्नत हुए और रनिंग कैनाल प्रशासन में कार्यरत रहे। इन्होंने कैनाल लाइनिंग के अतिरिक्त नियमन कार्य, हरियाणा कैनाल एवं ड्रेनेज़ अधिनियम के तहत आने वाले मामले और रेगुलेटरस, ड्रेनेज़ कार्यो, चैनलों एवं पुलों सहित हाइड्रॉलिक एवं अन्य सिविल संरचनाओं के निर्माण तथा परिचालन एवं अनुरक्षण कार्यों का कुशलतापूर्वक निष्पादन किया। इन्होंने लिफ्ट तथा ग्रेविटी कमाण्ड क्षेत्रों में भी बीस वर्ष तक कार्यकारी अभियंता के रूप में कार्य किया।

इंजी. अग्रवाल ने तीन वर्षों तक लिफ्ट कैनाल कमाण्ड्स में अधीक्षण अभियंता के रूप में, परिचालन एवं अनुरक्षण कार्यों के लिए पर्यवेक्षक अधिकारी के रूप में और पम्प हाऊîस के रेगुलेशन कार्यों के प्रभारी के रूप में कार्य किया है।

इंजी अग्रवाल ने अगस्त, 2008 से जल सेवा यूनिटों के प्रभारी मुख्य अभियंता के रूप में कार्य किया। इन्होंने 15 महीने तक भाखड़ा क्षेत्र के और 18 महीने तक यमुना क्षेत्र के मुख्य अभियंता के रूप में भी कार्य किया और ये भाखड़ा तथा यमुना कमाण्ड्स से संबंधित प्रमुख नियामक एवं अन्तर्राज्यीय मुद्दों के लिए तैनात रहे। इन्होंने भारत सरकार के साथ विभिन्न अन्तर्राज्यीय बैठकों में हरियाणा के जल क्षेत्र से संबंधित संवेदनशील मामलों का निपटान किया। इन्होंने केन्द्रीय जल आयोग, भारत सरकार की यमुना एवं घग्गर नदी संबंधी स्थायी समितियों के विभिन्न विचार विमर्शों में भी भाग लिया। इन्होंने वर्तमान सिंचाई विभाग के विकास के पूर्व इतिहास पर प्रकाश डालने वाले हरियाणा राज्य सिंचाई गज़ट का प्रारूप तैयार किया था।  

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सदस्‍य, भारत सरकार
Member, Government of India

जी. साईं प्रसाद का जन्‍म दिनांक 06.05.1966 को हुआ था। श्री जी. साई प्रसाद ने आईआईटी, दिल्ली से इलेक्ट्रॉनिक्स में एम.टेक किया और 1991 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए थे। उन्हें आन्ध्र प्रदेश कैडर आबंटित किया गया था।

    श्री जी. साई प्रसाद ने आन्ध्र प्रदेश में विभिन्न पदों पर कार्य किया। इन्होंने आईएएस अधिकारियों के लिए अनिवार्य सेवा मध्य प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिनांक 21.04.2007 से 25.05.2007 तक सेवा मध्य प्रशिक्षण प्राप्त किया। इन्होंने एड्मिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज आफ इन्डिया, हैदराबाद से डब्ल्यू टी ओ पर आधारभूत पाठ्यक्रम, नेशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ स्मॉल इन्डस्ट्री से एसएमई प्रमोशन पर ओरिएन्टेशन कार्यक्रम, हैदराबाद से एक्सटेंशन प्रशिक्षण, इनर्मी एण्ड रिसोर्सेज़ इन्स्टीट्यूट, नई दिल्ली से इन्फास्टूक्चर डी-रेगुलेशन्स और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इन्डिया यूनिवर्सिटी, बंगलौर से एमर्जिग़ ट्रेंडज इन एड्मिनिस्ट्रेटिव लॉ जैसे अनेक सेवा प्रशिक्षण भी प्राप्त किए हैं।

    श्री जी. साई प्रसाद फिलहाल भारत सरकार की सेवा में प्रतिनियुक्ति पर हैं और दिनांक 03.11.2011 से विद्युत मंत्रालय में संयुक्त सचिव, हाइड्रो के पद पर कार्यरत हैं। 

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सदस्‍य, भारत सरकार
Member,Govt. Of India

श्री जी. अरंगानाथन ने 1976 में अन्नामलाई विश्वविद्यालय से स्नातक किया और 1978 में भारतीय विज्ञान संस्थान से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, गिण्डी मे कुछ माह तक शिक्षण कार्य करने के उपरान्त, उन्होंने 1978 में केन्द्रीय जल आयोग में सेवा आरम्भ की और कंक्रीट तथा मेसनरी बांधों की डिज़ाइन पर कार्य किया। यहां ये मुख्यताः बाणसागर बांध की डिज़ाइन तथा सलाल जलविद्युत परियोजना के विशेष अध्ययन से जुड़े रहे। इन्होंने 1982-85 का समय रेलवे में व्यतीत किया और स्थायी मार्ग एवं कार्य, सेतु, दरार की पुनर्स्थापना, डिज़ाइन, सर्वे कार्य, भवन एवं सेतु-निर्माण से संबंद्ध रहे। इसके बाद, इन्होंने केन्द्रीय जल आयोग में अपनी सेवाएं जारी रखीं और इन्हें रोलर कम्पैक्टेड-कंक्रीट, सेल्युलर कॉफर बांधों तथा विशेष हाइड्रॉलिक अध्ययन से संबंधित विशेष विषयों के अतिरिक्त ओंमकारेश्वर एवं नर्मदासागर बांधों की डिज़ाइन का कार्य सौंपा गया। अपने कार्य के अनिवार्य भाग के रूप में कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग से संबद्ध होने के कारण, इन्हें 1991-95 के दौरान सॉफ्टवेयर मैनेजमेंट में शामिल किया गया। इसके बाद, ये कोयम्बटूर में केन्द्रीय जल आयोग के कावेरी एवं दक्षिण नदी क्षेत्र में स्थानान्तरित हुए, जहां ये मुख्यतः केरल में परियोजनाओं की निगरानी एवं मूल्यांकन से जुड़े रहे और अन्य फील्ड यूनिटों के मामलों का समन्वय भी करते रहे। इन्होंने नवम्बर, 1998 में जल संसाधन मंत्रालय में सिंधु खण्ड का कार्यभार संभाला और सिंधु जल समझौता, 1960 के अधीन भारत-पाकिस्तान संबंधी मामलों से संबद्ध रहे। इसके अतिरिक्त, ये पंजाब, हरियाणा, जम्मू एवं कश्मीर और राजस्थान के मध्य जल संसाधन विकास के अंतर-राज्यीय पक्ष से भी संबद्ध रहे। पाकिस्तान के अनुरोध पर विश्व बैंक द्वारा तदस्थ विशेषज्ञ की नियुक्ति से पहले इनकी बाग्लीहार जल विद्युत परियोजना (जम्मू एवं कश्मीर) से गहन संबद्धता रही। इन्होंने भारत तथा पाकिस्तान दोनों देशों में स्थायी सिंधु आयोग की कई बैठकों में भाग लिया और वर्तमान में सिंधु जल के लिए भारतीय आयुक्त के रूप में सेवारत हैं।



सदस्‍य, पंजाब
Principal Secretary to Government of Punjab

डॉ. जी. वज्रलिंगम

 
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सदस्‍य, हरियाणा

श्री के.के. जलान
हरियाणा राज्य के लिए विनिहित किए गए श्री के.के. जालान भारतीय प्रशासनिक सेवा (1982) के अधिकारी हैं। इन्होंने राज्य तथा भारत सरकार में अनेक पदों पर कार्य किया है। इन्होंने भिवानी, फरीदाबाद, सोनीपत, रेवाड़ी और करनाल के उपायुक्त के रूप में कार्य किया है। इन्हें सरकारी समितियों, खेल, आपूर्तियों एवं निपटान, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा परिवहन में निदेशालयों का अनुभव है। इन्होंने हरियाणा पर्यटन विकास निगम लिमिटेड और हरियाणा अनुसूचित जाति विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के रूप में भी कार्य किया है। राज्य में, इन्होंने लोक निर्माण (भवन एवं सड़क), सिंचाई, शहरी स्थानीय निकाय तथा नगर एवं ग्राम योजना विभाग जैसे अनेक विभागों के प्रधान सचिव के रूप में कार्य किया है। भारत सरकार में इन्होंने कपड़ा मंत्रालय में निदेशक तथा संयुक्त सचिव और परिधान निर्यात संवर्धन परिषद में महासचिव के रूप में कार्य किया है।
इनकी शैक्षिक योग्यताओं में बी.एससी. (आनर्स), एम.एससी. (गणित), एम.फिल. (गणित), बर्मिघम विश्वविद्यालय से विकास प्रशासन में एम.एससी. और लोक प्रशासन में एम.फिल सम्मिलित हैं। ये कभी-कभी विभिन्न रोचक विषयों पर समाचार पत्रों में लिखते हैं।

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सदस्‍य, हिमाचल प्रदेश
Member, Himachal Pradesh दीपक सानन