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सदस्य (विद्युत) |
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इंजी अशोक थापर
को भारत सरकार
द्वारा बीबीएमबी में सदस्य, विद्युत के रूप में नियुक्त
किया गया है।
इन्होंने अपने नए पद पर दिनांक 21.2.2011 को कार्यभार
संभाला। श्री थापर इलैक्ट्रॉनिक्स एण्ड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक हैं और
इनका विद्युत क्षेत्र के विभिन्न
पहलुओं जैसे पंजाब राज्य
बिजली बोर्ड (पं.रा.बि.बोर्ड अब पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड) के लार्ज फॉसिल फायर्ड थर्मल पावर
परियोजनाओं तथा
भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड की मीडियम टू लार्ज जल विद्युत
परियोजनाओं की प्लानिंग, डिज़ाइन, निर्माण, परीक्षण, आरम्भ
करने तथा उनका परिचालन और अनुरक्षण
करने का 34 वर्षों का गहन अनुभव है। |
| सदस्य, भारत सरकार | |
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जी.
साईं प्रसाद
का जन्म
दिनांक 06.05.1966 को हुआ था।
श्री जी. साई प्रसाद ने
आईआईटी, दिल्ली से
इलेक्ट्रॉनिक्स में
एम.टेक किया और 1991 में
भारतीय प्रशासनिक सेवा
में चयनित हुए थे।
उन्हें आन्ध्र प्रदेश
कैडर आबंटित किया गया
था।
श्री जी. साई प्रसाद
ने आन्ध्र प्रदेश
में विभिन्न पदों पर
कार्य किया।
इन्होंने आईएएस
अधिकारियों के लिए
अनिवार्य सेवा मध्य
प्रशिक्षण
कार्यक्रम में
दिनांक 21.04.2007 से 25.05.2007
तक सेवा मध्य
प्रशिक्षण प्राप्त
किया। इन्होंने
एड्मिनिस्ट्रेटिव
स्टाफ कॉलेज आफ
इन्डिया, हैदराबाद
से डब्ल्यू टी ओ पर
आधारभूत पाठ्यक्रम,
नेशनल इन्स्टीट्यूट
ऑफ स्मॉल इन्डस्ट्री
से एसएमई प्रमोशन पर
ओरिएन्टेशन
कार्यक्रम,
हैदराबाद से
एक्सटेंशन
प्रशिक्षण, इनर्मी
एण्ड रिसोर्सेज़
इन्स्टीट्यूट, नई
दिल्ली से
इन्फास्टूक्चर डी-रेगुलेशन्स
और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ
इन्डिया यूनिवर्सिटी,
बंगलौर से एमर्जिग़
ट्रेंडज इन
एड्मिनिस्ट्रेटिव
लॉ जैसे अनेक सेवा
प्रशिक्षण भी
प्राप्त किए हैं।
श्री जी. साई प्रसाद
फिलहाल भारत सरकार
की सेवा में
प्रतिनियुक्ति पर
हैं और दिनांक 03.11.2011
से विद्युत
मंत्रालय में
संयुक्त सचिव,
हाइड्रो के पद पर
कार्यरत हैं। |
| सदस्य, भारत सरकार | |
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श्री जी. अरंगानाथन ने 1976 में अन्नामलाई विश्वविद्यालय से स्नातक किया और 1978 में भारतीय विज्ञान संस्थान से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, गिण्डी मे कुछ माह तक शिक्षण कार्य करने के उपरान्त, उन्होंने 1978 में केन्द्रीय जल आयोग में सेवा आरम्भ की और कंक्रीट तथा मेसनरी बांधों की डिज़ाइन पर कार्य किया। यहां ये मुख्यताः बाणसागर बांध की डिज़ाइन तथा सलाल जलविद्युत परियोजना के विशेष अध्ययन से जुड़े रहे। इन्होंने 1982-85 का समय रेलवे में व्यतीत किया और स्थायी मार्ग एवं कार्य, सेतु, दरार की पुनर्स्थापना, डिज़ाइन, सर्वे कार्य, भवन एवं सेतु-निर्माण से संबंद्ध रहे। इसके बाद, इन्होंने केन्द्रीय जल आयोग में अपनी सेवाएं जारी रखीं और इन्हें रोलर कम्पैक्टेड-कंक्रीट, सेल्युलर कॉफर बांधों तथा विशेष हाइड्रॉलिक अध्ययन से संबंधित विशेष विषयों के अतिरिक्त ओंमकारेश्वर एवं नर्मदासागर बांधों की डिज़ाइन का कार्य सौंपा गया। अपने कार्य के अनिवार्य भाग के रूप में कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग से संबद्ध होने के कारण, इन्हें 1991-95 के दौरान सॉफ्टवेयर मैनेजमेंट में शामिल किया गया। इसके बाद, ये कोयम्बटूर में केन्द्रीय जल आयोग के कावेरी एवं दक्षिण नदी क्षेत्र में स्थानान्तरित हुए, जहां ये मुख्यतः केरल में परियोजनाओं की निगरानी एवं मूल्यांकन से जुड़े रहे और अन्य फील्ड यूनिटों के मामलों का समन्वय भी करते रहे। इन्होंने नवम्बर, 1998 में जल संसाधन मंत्रालय में सिंधु खण्ड का कार्यभार संभाला और सिंधु जल समझौता, 1960 के अधीन भारत-पाकिस्तान संबंधी मामलों से संबद्ध रहे। इसके अतिरिक्त, ये पंजाब, हरियाणा, जम्मू एवं कश्मीर और राजस्थान के मध्य जल संसाधन विकास के अंतर-राज्यीय पक्ष से भी संबद्ध रहे। पाकिस्तान के अनुरोध पर विश्व बैंक द्वारा तदस्थ विशेषज्ञ की नियुक्ति से पहले इनकी बाग्लीहार जल विद्युत परियोजना (जम्मू एवं कश्मीर) से गहन संबद्धता रही। इन्होंने भारत तथा पाकिस्तान दोनों देशों में स्थायी सिंधु आयोग की कई बैठकों में भाग लिया और वर्तमान में सिंधु जल के लिए भारतीय आयुक्त के रूप में सेवारत हैं। |
| सदस्य, पंजाब | |
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डॉ. जी. वज्रलिंगम |
| सदस्य, हरियाणा | |
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श्री के.के. जलान |
| सदस्य, हिमाचल प्रदेश | |
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दीपक सानन |